Monday, August 28, 2023

THE RICE CROP OF NOVEMBER :Jayant Mahapatra. Translated into Hindi by Dr.Chandrashekhar B.Sharma


 





                                                                                      नवम्बर मास में धान की फसल

THE RICE CROP OF NOVEMBER
नवम्बर माह की लहलहाती
धान की फसल
तैयार खड़ी है |
सच्ची है
सुखदायी है ,
झुकी हुई है ,
जैसे कुछ है जो उसे करना है
शायद ,
शायद निहारना है
उन खलिहानों को
जो दुःख और भुखमरी से घिरे हुए हैं |
 
यदाकदा ही बरखा होती है --
अन्यमनस्क हो ,
व्योम अस्थिर हो उठता है |
दूर ,कुछ स्त्रियाँ ,इकठ्ठे ,
घेरे हुए हैं
सेंदूर से सने हुए बूढ़े वटवृक्ष को --
एक दूजे के संग स्वप्न बुन रहीं हैं ,
तन्हा स्वप्न ,
अपनी अपनी आस्था के साथ!
 
खाली पिंजरे टकराते हैं
तेज सुनहरी हवाओं में ,
और वह नन्हा सा तोता
जो हमेशा जोश में रहता है
खुद को भुलाकर परवाज़ तो भरता है
पर पहुंच नहीं पाता कहीं !
 
क्या वही अन्धकार छा रहा है ?
जो स्वप्न को थामता है
भोर में पिघलने के पहले ?
विचरो नहीं उन कहानियों में
जो तुमने सुनी है ;
जो सुन सकते हैं ,
विश्वास कर सकते हैं
वे बघिर हो चुके हैं !
 
क्या क़ानून को कार्यान्वित
करने वाले जानते हैं
जिन्दगी से विलुप्त होना --
जैसे करोड़ों कुपोषित ,
भूखे लोग विलीन हो गये जिन्दगी से ?
 
यहाँ उनकी अनुपस्थिति
गा सकती है गान
जो प्रकट करेंगी उनकी विकृतियाँ !
और स्त्रियाँ प्रेम करेंगी
अपने दुखों से भी
क्योंकि उनकी जिन्दगी
उष्ण चावलों -सी अंगारों में
पकी हुई है ,
जिन्हें बच्चे चाट चाट कर खाते हैं |

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