Saturday, September 24, 2022

पुनर्भवः...REBIRTH

 पुनर्भवः


ज़ेहन में रचीबसी मादरी जुबान अक्सर अपना वजूद का इजहार मुझसे करती रहती है।दूसरी भाषाओं में जब भी कुछ पढ़ता हूँ तो मेरी  हिंदुस्तानी जुबान उसे खुद के रंग में रंगने लगती है।एक नए चोले में जब दूसरी भाषा मेरी हिंदुस्तानी में जन्म लेती है तो अचरज और खुशी के साथ उसे निहारने लगता हूँ।यह ब्लॉग एक ऐसी ही यात्रा का खूबसूरत  मोड़ है जो अनुभव, पुनर्भवः, जन्म,पुनर्जन्म की एक अंतहीन कहानी है।मेरी अपनी हिंदुस्तानी जुबान में आप पढ़ पायेंगे वो सब जो अब तक मैंने अंग्रेज़ी,डोगरी,मराठी,हिंदी ,उर्दू,और पंजाबी में पढ़ा हुआ है।एक सफर...अनुभव से पुनर्भवः का!

@Chandrashekhar B.Sharma [All Rights Reserved]


4 comments:

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  2. ಕಾವ್ಯವು ಅನ್ಯ ಭಾಷಿಕರನ್ನು ತಲುಪುವುದು ಕವಿಯ ಪುನರ್ಜನ್ಮವೇ ಸರಿ. (You are right sir, Poetry reaching other speakers is the rebirth of the poet.)

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