Ulysses
ALFRED, LORD TENNYSON
युलिसिस
नफ़े का सौदा नहीं एक निकम्मा हुक्मरान होना,
बुझे हुए चूल्हे से दो चार होना,
उजड़े ,वीरान मंज़र के बीच,
थक चुकी अधेड़ हमसफ़र का
बेजोड़ साथ होना,
रूबरू होता हूँ रोज़ गैर मसावी रिवायतों से
इन जाहिलों की कौम से,
जो सिर्फ जमा करना,सोना,खाना जानती है,
बस जानती नहीं
तो सिर्फ मुझे!
ये मुसलसल सफर मुझे थका नहीं सकता:
हलक़
जिंदगी की टपकती आखरी बूंद से
तर नहीं हो सकता :
हर लम्हा जिया है जिंदादिली के साथ
अज़ाब भी झेला है
कभी अजीजों
और कभी तन्हाई के साथ;
तट पर,
कभी काले स्याह घुमड़ते बादलों से गुजरता
कभी दो-दो हाथ समंदर तूफानी से करता :
मशहूर हो गया हूँ मैं;
भटकता हूँ मैं
दिलोजिगर में समेटे भूख और प्यास
देखा बहुत कुछ
और जाना बेशुमार;
आदम की बस्तियों में इंसानियत का बसेरा,
शहरों की गलियों में रिवायतों का रेला,
मौसम का बदलता तसव्वुर भी देखा
हुकूमतें भी बहुत परखी,
अनगिनित जमातों से हुआ राबता :
आँका ना गया कमतरीन कभी किसीसे,
इज्जत और एहतेराम मिला हर काबिल शख्श से;
खूब मनाई खुशियां मैदाने जंग में यारों
तूफानी ट्रोय में गूँजती तलवारों संग प्यारों।
बदला ना जा सके
वो नाक़ाबिल-ए-तलाफ़ी बन्दा हूँ
जो पाया है मैंने
उसका अज़ीम हिस्सा हूँ;
हर एक तजुर्बा बनता जाता मेहराब
अनोखी अनजानी दुनिया की झिलमिलाहट के साथ
सरहदें अक्सर धूसर होती रहती हैं
कूच करता हूँ जब भी लामलश्कर के साथ।
बोरियत से भरा है थमने का नाम,
मंजिल पर पहुँचे बगैर
ख़ाक हो जाना नहीं जोशीलों का काम ,
बगैर जंग के जंग लगने देना ,
जड़ बनकर चमकते ना रहना...
जैसे साँस लेना ही जिंदगी हो!
जिंदगी का ढेर कम पड़ जाएगा
इस जिंदगी में लम्हों का टोटा हो जाएगा:
लम्हों को जी लूँ कब्र में उतरने से पहले
लम्हा-लम्हा बटोर लूँ अंतिम खामोशी के पहले,
कुछ और की चाह है
जिंदगी तुझसे नई दरकार है!
बेमानी है गुप्प अंधेरी गुफ़ा में
कायनात पाना-छुपाना
लानत है मुझपर
गर समेट लूँ सिर्फ तीनों आफ़ताब का नजराना!
ये बाँवरी आत्मा तड़पती-तरसती है
उम्मीद की आग को जलाए रखना चाहती है...
पीछा करता हूँ ए इल्म तेरा डूबते तारे समान,
दहलीज़ लाँघना चाहता हूँ
इंसानी ख्यालों के उसपार
आज!
ये है मेरा बेटा, मेरा प्यारा टेलीमैकस,
जिसे मैं अपना तख्तोताज़ और द्वीप सौपें जा रहा हूँ,---
लगतेजिगर है मेरा,
जानता हूँ जोशोखरोश से जिम्मेवारी निभाएगा,
होशियारी से नरमी दिखाकर
जाहिल जनता पर राज कर पायेगा।
बेगुनाह है वो,
जिम्मेवारियों का निबाह करने वाला,
तमीज़ का अमीर
नरमाई से सभी को साथ लेकर चलने वाला,
अल्लाह का मुरीद है
मेरा बेटा है सजदे में माथा झुकाने वाला!
ख्याल रखेगा सभी का
आम और खास
चले जाऊँगा जब मैं
छोड़ सभी का साथ!
वो अपना काम करेगा,
मैं
अपना!
देखो !सामने बन्दरगाह है;
समुद्री-जहाज तैयार है:
असीम समंदर में अंधकार पसरा है...
मेरे मल्लाहों,
रूह को रूह ने राह दिखाई है
कड़ी मेहनत और लगन से
मुश्किलों की जड़ें
हमनें हरदम हिलायी है,
तूफानों का रुख भी मोड़कर
आजमाइश की चोट सीने पर खाई है---
हँसते हुए किया है
तूफानों और आफ़ताब-रोशनाई का इस्तक़बाल,
दिलोजिगर आज़ाद रखा
लम्हा-लम्हा ज़ेहन को रखा मालामाल---
तुम और मैं अब बूढ़े हो चुके हैं;
बुज़ुर्गीयत अपने आप में है एक मिसाल
हर लम्हा एक तज़ुर्बा होता है खासमखास;
मौत से रूबरू होना क़ुदरत की इनायत है
ए जिंदगी
तेरी तो ये आखरी मन्ज़िल है:
पर इस आखरी लम्हे के पहले ,
कुछ मोजिज़ कर जाऊँगा,
जो किसीने ना किया हो
वो वली के साथ कर जाऊँगा।
चट्टानों के पार टिमटिमाने लगी है रोशनाई:
दिन ढल रहा है:
कतरा दर कतरा महताब आसमां चढ़ रहा है:
समंदर की लहरें लहरा रहीं हैं
गहराइयाँ रुदन-गान गा रहीं हैं।
आओ यारों,
देर नहीं हुई है
फ़तह कर लो एक और नई दुनिया !
चले चलो,
पतवार को खे कर
जहाज़ की रुखसती करो;
इरादा है मेरा,
मौत के पहले
जाना है मुझे ग़ुरूब-ए-आफ़ताब के पार
सराबोर होना है मग़रिबी सितारों की रोशनाई से आज।
मुमकीन है समा लेंगी खुद में
समंदर की लहरें हमें:
ये भी मुमकीन है
पहुँचा देगी हमें ख़ुशगवार मन्ज़िल पे,
गर मुक्कदर ने साथ दिया
तो मुलाकात हो जाएगी अज़ीम ऐशीलस से।
बहुत कुछ पाया
खोया भी बहुत कुछ ,
बर्दाश्त भी किया,
सहा भी सब कुछ ;
ताकत नहीं रही पुरानी
जिसने जमीं -आसमां को क़ाबू किया था,
खैर हम जो हैं, वो हैं!
एक जैसा मिजाज़ और दिल शहंशाह!
सच है
समय और मुक्कदर करते कमजोर,
मगर हम नहीं खौफ़ खाते किसीसे दोस्त
हौसला हमारा लोहा मनवायेगा
हम जद्दोजहद करेंगे,
खोज जारी रखेंगे,
पायेंगे सबकुछ,
कभी मात नहीं खायेंगे!
@Chandrashekhar B.Sharma [ALL RIGHTS RESERVED]
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