Sunday, September 25, 2022

THE WHITE BIRDS-W.B.YEATS

 THE WHITE BIRDS-W.B.YEATS


श्वेत पंछी --विलियम बटलर येट्स


काश हम होते ,मेरी प्रिये,श्वेत पंछी
और अठखेलियाँ करते  फेनिल उदधि की लहरों पर!
हमें ऊब जाना चाहिए उल्का की चमक से ,
इससे पहले की वह क्षीण और लुप्त  हो जाए ;
और  सांध्य -प्रकाश के  नीले तारे की उस चमक से ,
जो पसरी रहती  है किनारे व्योम के !
उसने पसरा  दी है हमारे दिलों में ,मेरी प्रिये,
एक  गहरी उदासी,असीम!
ऊब हो जाती है  उन स्वप्नदर्शियों  ,
शबनम -बौछार से नहाये गुलाब और कुमुदिनी से ;
आह,स्वप्न न देखो,मेरी प्रिये,उस उल्का की चमक के
जो कुछ पलों में क्षीण हो जाएगी ,
या फिर वह चमक नीले तारे की
जो रौशन हो  जाती है हौले-हौले
शबनम के नीचे गिरने के संग-संग :
 चाहता हूँ मैं
 कि हम तब्दील हो जाएँ श्वेत पंछियों में
फड़फड़ाते हुए पंख परवाज़ भरें फेनिल उदधि पर :मैं और तुम!
 मुझे याद आते हैं असंख्य  द्वीप ,
और बहुतेरे किनारे दनान के,
 जहाँ समय हमें बिसरा देगा ,
और दुःख छू भी न  पायेगा हमें कभी ;
जल्द ही हम हो जाएंगे दूर
गुलाब और कुमुदिनी से,
और बन जायेंगे फड़फड़ाहट लौ की  ,
काश हम होते श्वेत पंछी,मेरी प्रिये ,
फेनिल उदधि की लहरों पर तैरते हुए !

@Chandrashekhar B.Sharma [ALL RIGHTS RESERVED]

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