THE SECOND COMING-W.B.YEATS
पुनरागमन
विस्तीर्ण चक्रगती में घूम-घूमकर
बाज़ नहीं सुन सकता है खुद के प्रशिक्षक को ;
पृथक होकर चीजें दूर गिर जातीं हैं ;
केंद्र नियंत्रित नहीं कर सकता है ;
सिर्फ अराजकता स्वच्छंद हो घुमती है संसार में ,
रक्तरंजित ज्वारभाटा मुक्त हो जाता है ,
और हर जगह
डूब जाता है निष्कपटता का शिष्टाचार ;
जो सर्वोत्कृष्ट है वे दृढविश्वास खो चुके हैं
जबकि घटिया लबरेज़ हैं तीव्र उत्तेजना से |
निसंदेह कोई रहस्योदघाटन होने वाला है
निसंदेह पुनरागमन होने वाला है |
पुनरागमन !
जैसे ही यह शब्द उच्चारित हुआ
तब एक विशाल प्रतिबिम्ब स्पिरिट्स मुंडी से
भयभीत करता है मेरी दृष्टि को :
कहीं रेगिस्तान में एक आकार
जिसका शरीर सिंह का और सिर पुरुष का
जिसकी नजर भावशून्य और निर्दयी आदित्य समान
सरका रहा है अपनी मंद जाँघों को ,
जबकि चहुं ओर नाचती है परछाईयाँ
रेगिस्तान के क्रुद्ध पक्षियों की|
घोर अन्धकार छा जाता है ;
पर अब मुझे पता है कि बीस शताब्दियों कि
पथराई नींद घबरा गयी है दुस्वप्न से ,
एक डोलते हुए पालने से ,
और क्या एक विषम पशु का
समय आ गया है घूमकर ,आखिरकार
जो झुककर चल रहा है
जन्म लेने के लिए बेथेलेहम की ओर ?
@Chandrashekhar B.Sharma [ALL RIGHTS RESERVED]
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