Tuesday, October 18, 2022

TRANSLATION OF 'संगरोध' INTO MAGAHI/MAGHADI-SANDHYA MISHRA

 






SANDHYA MISHRA

हर्ष से हर्षित हर्ष

हसत हे

हसा्वत हे

घर के  हर कोना में

इठलावत हे

गुनगुनावत हे

तू हमार हे

आऊ हम तोहर.....।।

पैसा के झनझनाहट

गुंज रहत हे

मट्टी के टूईंया में जैसे

बरखा के बुन

पड़ल हे

गरम छतिया पर

फिसल रहल हो जैसे......

कहां से चलल हो देखी

मंद मंद पवन

कौन हे विधाता

ई जगत के

हरदम

जो रक्षा करत हे

हम्मर आऊ

तोहर....।।।।

ई खिडकी से

ई घर के

पुरान सम्बन्ध हे

गली कुची मे

टहलत हे खाली पाव

एक दुख

काव्यात्मक भावना हे......

नरक उ गली कुची से

बार बार पुकारत हे

कौन अभागा के

घर बनाई

यही कहत हे.....।

हर्ष की बेड़ी से

बंधल हे

दिल आउ दिमाग के चक्रव्यूह 

सत्य तोहर दर्पण

कोसो दूर टंगल हे

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