Still I Rise
BY MAYA ANGELOU
फिर उठ खड़ी हो जाऊँगी
दफ़न कर सकते हो मुझे
इतिहास के पन्नों में लिखकर कड़वाहट,
तोड़-मरोड़ के पेश कर सकते हो झूठ और बनावट,
तुम लोटा सकते हो मुझे गंदगी में,
पर तब भी,
धूल की तरह उड़ जाऊँगी,
मैं फिर उठ खड़ी हो जाऊँगी!
क्या मेरी जिंदादिली तुम्हें परेशान करती है?
उदासी अक्सर तुमपर वार करती है?
क्या इसीलिए की मैं चलती हूँ
तेल के कुओं की मालकिन जैसे
निकालती हूँ तेल अपनी बैठक में बैठे!
चाँद और सूरज की तरह ,
यकीन के ज्वार में लहराउंगी
आशा की डोर थामे
ऊँची उड़ान भरकर
मैं फिर उठ खड़ी हो जाऊँगी।
क्या मुझे टूटा हुआ देखना चाहते हो?
सिर और नज़रें झुकाकर चलना सिखाते हो?
आँसुओं की बूँदों की तरह लुढ़कते काँधे,
क्या रूह को रुलाकर मुझे तोड़ना चाहते हो?
क्या मेरा अभिमान तुम्हें खलता है?
क्यों उठाते हो इतना बोझा जो मंहगा पड़ता है,
इसलिए की मैं हँसती हूँ
सोने की खान की मालकिन की तरह
पीछे आँगन में सोना खोदती हूँ!
शब्दों की गोलियों से भून सकते हो मुझे,
घूरती नज़रों से काट सकते हो मुझे,
घृणा से मार सकते हो मुझे,
तब भी ,उठ खड़ी हो जाऊँगी
हवा संग लहराउंगी!
क्या मेरी शोख़ी, मेरी कामोत्तेजकता
तुम्हें परेशान करती है?
आश्चर्य से आँखें तुम्हारी फट जाती है?
देखते हो जब नाच करती एक हसीना
मिल गया हो जैसे ,जाँघों के मिलन से ,
उसे हीरों से भरा खजाना?
शर्मोहया के इतिहास से निकलकर बाहर आऊँगी,
दुखदर्द की जड़ों को उखाड़कर निश्चिंत हो जाऊँगी
काला स्याह समंदर हूँ मैं,
असीम,लहराता हुआ,
कभी ऊपर ,तो कभी नीचे लहरों संग गोते खाऊँगी,
मैं फिर उठ खड़ी हो जाऊँगी!
पीछे छोड़ जाऊँगी दहशत और डर की रातें
नये नवेले सबेरे में सराबोर हो जाऊँगी
सँजोके अपने पूर्वजों के तोहफ़े,
आशाओं के सपने सारे गुलामों के नाम कर जाऊँगी,
मैं उठ खड़ी हो जाऊँगी
मैं उठ खड़ी हो जाऊँगी
मैं फिर उठ खड़ी हो जाऊँगी...

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