Translated into Hindi by Dr.RAJSHRI SANJAY GAJGHATE
[Smt. Binzani Mahila Mahavidyalaya, Nagpur, Maharashtra]
यदी
यदी तुम हमेशा अपना दिमाग शांत रख सकते हो , जब सभी अपना आपा खो रहे हैं और तुम पर दोष दे रहे हैं ,
यदि तुम स्वयं पर विश्वास रख सकते हो जब सभी तुम पर अविश्वास कर रहे हो,
पर उनके अविश्वास को भी स्थान दो ;
यदि तुम राह देख सकते हो और राह देखते हुए थकते नही हो ,
या तुम्हे झूठ बताया गया है , उस झूठ पर विश्वास मत करो;
या तुमसे ईर्ष्या की जाती है, उस ईर्ष्या को स्थान मत दो ,
और फिर भी बहुत अच्छे मत दिखो, ना ही बहुत बुद्धिमान की तरह बोलो;
यदि तुम स्वप्न देख सकते हो - और सपनों को अपने पर हावी नही होने देते हो;
यदि तुम विचार कर सकते हो- और विचारों को अपना लक्ष्य नही बनाते हो ;
यदि तुम जीत और हार या प्रलय का सामना कर सकते हो और इन दोनो धोखेबाजों को समान समझते हो;
यदि तुम तुम्हारे द्वारा बोले गये सत्य को सुन सकते हो ,
धूर्त द्वारा मूर्ख को फसाने के लिये बनाया गया जाल तोड सकते हो,
या तुम तुम्हारे जीवन को बनाने हेतू लगी हुई बातों को तुटता हुआ देख सकते हो,
और झूको और पूरी शक्ती से , सामर्थ्य से पुनः उन्हें निर्माण करो;
यदि तुम अपनी उपलब्धियो को एकत्रित कर सकते हो ,
और एक क्षण के खतरे को ताक पर लगा सकते हो और हारते हो, और पुनः नये सिरे से शुरुआत कर सकते हो,
और अपने नुकसान के बारे मे कभी जिक्र नही करते हो ,
यदि तुम अपनी पुरी शक्ति , तन -मन से आगे बढ रहे हो, पुरी तरह से तुटते हुए भी,
और हिम्मत नही हारते हो जब तुम मे कुछ भी शेष न हो सिवाय इच्छा शक्ति के;
जो तुमसे मानो कह रही हो : धैर्य रखो ;
यदि तुम कई लोगों से बात कर सकते हो और भीड मे भी अपना गुण नही खोते हो ,
यदि तुम राजाओ या बडे लोगॉ के संग विहार कर सकते हो और फिर भी अपना सामान्य भाव नही खोते हो,
यदि ना मित्र ना ही शत्रु तुम्हे तक्लीफ पहुचा सकते है,
यदि सभी लोग तुम्हारे साथ मान्य हो पर कोई तुम पर हावी ना हो;
यदि तुम नगण्य मिनिट को भी साठ सेकंद के महत्वपूर्ण कार्य से भर सकते हो,
तो यह धरती तुम्हारी है और धरती की सभी वस्तूए तुम्हारी है,
और सबसे महत्वपूर्ण- तुम एक परिपूर्ण मनुष्य बनोगे- मेरे बेटे !

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