A Fable
BY LOUISE GLÜCK
एक अफ़साना
दो औरतें एक ही चीज़ पर
हक़ जताने लगीं
लगाने लगी गुहार
शहंशाह के दरबार में।
दो औरतें,
मगर एक ही बच्चा।
शहंशाह समझ गया कि कोई एक झूठ बोल रही है।
उसने कहा बच्चे के दो टुकड़े कर दो;
कोई भी खाली हाथ नहीं लौटेगा।
उसने म्यान से तलवार खेंची।
दोनों में से एक औरत ने
अपने हिस्से को तज दिया:
यह संकेत था,
एक सीख!
फ़र्ज़ करो
अपनी अम्मी को तुम देखते हो
दो बेटियों के बीच बंटा हुआ:
तुम क्या करोगी उसे बचाने के लिए
खुद को मिटाने की चाहत नहीं रखोगी?
वो जान जाएगी
कौन उसकी असली बेटी थी,
जो अपनी अम्मी का बंटवारा
सहन नहीं कर सकती थी
कभी!
@DR.CHANDRASHEKHAR B.SHARMA

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