Saturday, June 24, 2023

CULCUTTA IF YOU MUST EXILE ME:Pritish Nandi Translated into Hindustani by Dr. Chandrashekhar B.Sharma

 


कलकत्ता  गर तुम मुझे निर्वासित करो
CULCUTTA IF YOU MUST EXILE ME
--प्रीतीश  नंदी 
कलकत्ता
 गर तुम मुझे देशनिकाला दोगे
तो मेरे जाने के पहले
जख्मी कर देना मेरे होंठ
सिर्फ अल्फाज़ बचे रहें
और कोमल स्पर्श
तुम्हारी अँगुलियों का
 मेरे होंठों   पर

कलकत्ता
मेरी आँखों को भस्म कर देना
अंधकार  में जाने से पहले

एक  सिरकटी लाश ढाकुरिया गली में
एक अधमरा   युवक
      जिसका दिमाग विस्फोट से उड़ गया  |
और  खामोश गश्त पतालदंगा गली में
जहाँ तुम भून दिए जाते हो ,
बदले और घृणा  के बगैर |

कलकत्ता
 गर तुम मुझे निर्वासित करो
 तो मेरे जाने से पहले
मेरी आँखों को भस्म कर दो
वे तुम्हे खींचेंगे नीचे की ओर
 
ओक्तुर्लोनी  स्मारक से
और तोड़ेंगे छाती की पसलियाँ
वे नोच लेंगे दुःख
 तुम्हारी उदास आँखों से
और भोंक देंगे संगीन
 तुम्हारी जाँघों में

कलकत्ता
 वे तुम्हे चिर देंगे जरासंध  जैसे
वे तुम्हारे हाथ बाँध देंगे पीछे की ओर
और टंगा देंगे तुम्हे शब्दहीन क्रूस पर
और जब तुम्हारी चुप्पी विद्रोह करेगी
तब वे फांसी लगा देंगे
 तुम्हारे कहे हुए शब्दों को

कलकत्ता वे तुम्हे जला देंगे

कलकत्ता
 सह लो  बदला अपनी जाँघों में
और जलो शान्ति से संताप की देह में
गर तुम्हारी इच्छा होती है
 आत्महत्या करने की
तब रिक्शा लेकर 
सोनागाछी चले जाना
और बांटना वह खंडित घमंड
 उस औरत की आँखों से
जो स्वेच्छा से मरी हो

इंतजार करो मेरा उजाला  थियेटर  के बाहर
और मैं लाऊंगा तुम्हारे लिए लहू
 एक अपंग  कोढ़ी का
जो पागल हो गया था भूख से
और घावों से उसे मृत्यु मिल गयी
मैं तुम्हे दिखाऊंगा
 उस औरत की थकान
जो मर गयी थी पास 
चितपुर के,
 ऊबने से ,
और बड़ेबाज़ार  के पिंजरे जहाँ उन्माद छुपा बैठा है
कुंवारियों की  झुर्रियों में
जो इंतजार में बूढी हो गयीं
वासनाहीन   युद्ध
जो कभी हुआ ही नहीं

सिर्फ वासना रह जाती है
 उनकी आँखों में
जब समय ने ठंडा कर दिया
  उनकी जाँघों को

और मैं तुम्हे दिखलाऊंगा
वह फेरी लगाने वाला
जो मर गया कलकत्ता को
अपनी आँखों में संजोये

कलकत्ता
 गर तुम बहिष्कार करो मेरा
तो मेरा  नाश कर देना
मेरी बुद्धि का भी
मेरे जाने से पहले !

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